नाव
शिवदयाल
कागज की है
यह नाव
ओ लहरों ....
देखना,
अपनी तरंगों की गति में
कहीं इसे ले न डूबना
यह नाव कागज की है !
चलेगी थोड़ी दूर,
भीगेगी, फूलेगी
धीरे-धीरे इसमें रिसेगा पानी
फिर खुद ही ढूँढ लेगी सतह
तब तक लिए जाना
इसे नजरों से दूर
और करने देना किल्लोलें
शिशु -मन को !
ओ लहरों ...
(दस्तावेज में प्रकाशित )
शिवदयाल
कागज की है
यह नाव
ओ लहरों ....
देखना,
अपनी तरंगों की गति में
कहीं इसे ले न डूबना
यह नाव कागज की है !
चलेगी थोड़ी दूर,
भीगेगी, फूलेगी
धीरे-धीरे इसमें रिसेगा पानी
फिर खुद ही ढूँढ लेगी सतह
तब तक लिए जाना
इसे नजरों से दूर
और करने देना किल्लोलें
शिशु -मन को !
ओ लहरों ...
(दस्तावेज में प्रकाशित )
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