Saturday, 13 April 2013

कुछ छोटी कविताएँ 

जीवन 

एक बूँद प्यास 
एक तिनका आस 

बीत गयी साँस !

नेह
  
मैं 
वह सुन्दर दीप्ति 
हो सकता हूँ 
जिसे नेह से 
बार-बार छूकर 
तुम 
अपना हाथ जला लोगे. .


देर में  

देर में 
रुकी हवा बह चली 
देर में महमह हुई रात 
देर में   भीगी दूब  पर 
बिछे हरसिंगार 
देर में 
मकरंद से लिपटा  भौंरा 

देर में 
जरा देर में 
तुमसे मैं कह सका -

मुझे तुमसे प्यार है ! 
               

-शिवदयाल 
 



  




  नव-चैतन्य के महावट - रवींद्रनाथ                                 - शिवदयाल  ब चपन में ही जिन विभूतियों की छवि ने मन के अंदर अपना स्थाई निवा...