कुछ छोटी कविताएँ
जीवन
एक बूँद प्यास
एक तिनका आस
बीत गयी साँस !
नेह
मैं
वह सुन्दर दीप्ति
हो सकता हूँ
जिसे नेह से
बार-बार छूकर
तुम
जीवन
एक बूँद प्यास
एक तिनका आस
बीत गयी साँस !
नेह
मैं
वह सुन्दर दीप्ति
हो सकता हूँ
जिसे नेह से
बार-बार छूकर
तुम
अपना हाथ जला लोगे. .
देर में
देर में
रुकी हवा बह चली
देर में महमह हुई रात
देर में भीगी दूब पर
बिछे हरसिंगार
देर में
मकरंद से लिपटा भौंरा
देर में
जरा देर में
तुमसे मैं कह सका -
मुझे तुमसे प्यार है !
-शिवदयाल
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