Friday, 8 March 2013

मीनू मैम की हँसी
                                -शिवदयाल
बहुत जतन से
बचाई गई कोई चीज
ज्यों दिखा दी जाए
किसी को चौंकाने
या अपना ही आह्लाद दिखाने को
- ऐसे ही फैलती है
थोड़े-से मोटे होठों पर
मीनू मैम की हँसी !

एरियर, इन्क्रीमेन्ट
खाली बस
किसी सहकर्मी की लिफ्ट
बॉस द्वारा प्रशंसा
बच्चों की कभी-कभार की लाग-लपेट और लाड़ व
उनकी उपलब्धियाँ
बुजुर्ग पति की दुर्लभ चेष्टाएँ
व्यस्त दिनचर्या में से निकाली गई कोई  ट्रीट ...

मीनू मैम की हँसी
जैसे उत्सव-क्षणों का निर्वाह है !


मीनू मैम की बिन्दी

भवों के सन्धि-स्थल के ठीक ऊपर
अब सिर्फ हल्का-सा एक दाग है

लम्बे वर्तुल केशों के बीचोंबीच
काढ़ी गई माँग में
खूब चौड़ा सिन्दूर भरती थी कभी मीनू
अँजी हुई पनीली आँखों के ऊपर
तनी हुई भवों के क्षितिज के बीचोंबीच
उठता था जैसे
सुबह का सूरज - टेस लाल

यह मीनू से मैम बनते-बनते में
माथे पर घुलते-फैलते-पसरते
कुमकुम की जगह ले ली
प्लास्टिक की चिपचिपी बिन्दी ने
और इस बिन्दी ने छोड़ा -
यह गोल, कहीं गोरा धब्बा

अब भी कभी-कभी
जो दमक जाती है
मीनू मैम के माथे पर मखमली बिन्दी
वह फुर्सत का  एक रोमानी ‘चेंज’ हैं !

                                                  -शिवदयाल

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