Thursday, 7 March 2013

मीनू मैम का पर्स  
                                                 - शिवदयाल

घर  से निकलते-निकलते
उसे टाँग लेती हैं वे यंत्रवत्
न जाने कितनी बार
टटोलना पड़ता है उसे
दिन भर में

आइडेन्टिटी कार्ड और
डाक्टर का प्रेस्क्रिपशन
कुछ जरूरी गोलियाँ
नोट और रेजगारियाँ
चुकाए जाने वाले बिल
खरीदे गए सामानों की कुछ रसीदें
टेलीफोन डायरी, नेलकटर...
और पसीने और प्रसाधन की
मिली-जुली गंध वाला
एक लेडिज रूमाल !

पर्स है तो जैसे
मुकाबले का हौसला है ।

घर लौटने पर सबसे पहले
जिस चीज को वह खुद से
अलग करती हैं - उसे सोफे पर दे फेंक
वह है मीनू मैम का पर्स !

जब कि मीनू मैम की पर्स में बंद हैं
मीनू मैम का वजूद !
 

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