वसंत
- शिवदयाल
इस फूलों के मौसम मेपेड़ के पत्ते
कितने जवान हो गए हैं
कि धूप भी
कैसी सुर्ख हो आई है !
ऐसा वसंत
मेरे तुम्हारे बीच
कभी नहीं आया
लेकिन देखो न,
मौसम रह-रह कर
मुझसे गिला करता है
कि अब भी तुम्हारे साथ बीते
पतझड़ के वे दिन ही
मेरी आँखों में समाए हुए हैं !
२.
वह देखोकि धूप भी
कैसी सुर्ख हो आई है !
ऐसा वसंत
मेरे तुम्हारे बीच
कभी नहीं आया
लेकिन देखो न,
मौसम रह-रह कर
मुझसे गिला करता है
कि अब भी तुम्हारे साथ बीते
पतझड़ के वे दिन ही
मेरी आँखों में समाए हुए हैं !
२.
माँगता अभयारण्य
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गमले में उगी
सरसों में दुबका वसंत!
क्या कहा जाए सर..................प्रसन्नता और उदासी दोनों ऐसी गुंथ गई हैं कि कोई एक निश्चित प्रतिक्रिया नहीं हो सकती....।
ReplyDeleteबस इतना कह सकता हूं.....बहुत बढि़या।