बिजूका ब्लाॅग पर मेरी कविताएँ...
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''बहुत लुट जाने के बाद भी हमारे पास देने को बहुत कुछ बच जाता है..!''(छिनते पल छिन, शिवदयाल )
नव-चैतन्य के महावट - रवींद्रनाथ - शिवदयाल ब चपन में ही जिन विभूतियों की छवि ने मन के अंदर अपना स्थाई निवा...
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