Tuesday, 8 January 2013

तिलिस्म
                             -शिवदयाल

री ...
तूने यह क्या जीया
कि जितना जीया
अपने ही खिलाफ जीया

री ...
तूने यह क्या सिरजा
कि जो भी सिरजा
अपने ही खिलाफ सिरजा

री ...
तूने यह कितना बरजा
कि जो भी बरजा
अपने ही खिलाफ बरजा

री ...
तोड़, अब
अपने ही खिलाफ
इस तिलिस्म को तोड़
अपने से भी अपने को जोड़ !

2 comments:

  1. तोड़, अब
    अपने ही खिलाफ
    इस तिलिस्म को तोड़

    ReplyDelete

  नव-चैतन्य के महावट - रवींद्रनाथ                                 - शिवदयाल  ब चपन में ही जिन विभूतियों की छवि ने मन के अंदर अपना स्थाई निवा...