''बहुत लुट जाने के बाद भी हमारे पास देने को बहुत कुछ बच जाता है..!''(छिनते पल छिन, शिवदयाल )
Monday, 12 November 2012
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
नव-चैतन्य के महावट - रवींद्रनाथ - शिवदयाल ब चपन में ही जिन विभूतियों की छवि ने मन के अंदर अपना स्थाई निवा...
-
अंत, अंत हे गर्दनीबाग ! विकास की भेंट चढ़ते अनेक इलाकों में से एक का आर्तनाद.... 1912 में अलग बिहार राज्य बनने के बाद सचिवालय बन...
-
शिवदयाल की कविताएं बगुले और तबेले - शिवदयाल ताल में नहीं तबेले में उतर रहे थे बगुले उनकी पीली चोचों में मछलियाँ नहीं कीलनिया...

अति सुन्दर।
ReplyDelete