Tuesday, 10 March 2015

''दायरा '' मराठी में अनूदित
स्त्री चेतना की प्रतिष्ठित  मराठी पत्रिका ' मिळून साऱ्याजणी ' के  ताजा  अंक में मेरी  कहानी 'दायरा ' अनूदित होकर छपी है। अनुवादक हैं प्रख्यात कवयित्री, लेखिका आदरणीया उषा मेहता। कृतज्ञ हूँ! पत्रिका की संपादकद्वय  हैं आदरणीय विद्या बाळ एवं डॉ गीताली वि. मं । दोनों के प्रति आभार !
दायरा जनसत्ता वार्षिकांक 2009 में छपी थी। शहर में हुए धमाके का दो कम उम्र सखियों के नाजुक रिश्तों पर क्या असर हो रहा है : कहानी इस बारे में है।
इसे निम्न लिंक पर पढ़ा जा सकता है : http://sheodayal.blogspot.in/2012/11/18.html

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