Tuesday, 27 August 2013

काव्य संगम का आयोजन
राजेंद्र राजन का एकल पाठ  एवं कवि गोष्ठी 

महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद की स्मृति में स्थापित पटना स्थित श्री ब्रजकिशोर स्मारक प्रतिष्ठान के तत्वावधान में 18 अगस्त, 2013 को ’काव्य संगम’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में दिल्ली से आए चर्चित कवि राजेन्द्र राजन का कविता पाठ हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता मूर्धन्य कवि आलोक धन्वा ने की जबकि विषय-प्रवेष एवं संचालन कथाकार शिवदयाल ने किया।

सत्र के प्रारंभ में कवि परिचय कराते हुए शिवदयाल ने कहा कि राजेन्द्र राजन हिन्दी कविता में एक उम्मीद की तरह हैं। वे बेहद जमीनी कवि हैं। जितना जमीनी उनका व्यक्ति है उससे भी ज्यादा जमीनी उनकी कविताई है। उनकी कविताओं का वितान बहुत बड़ा है। वे बिल्कुल सादे ढंग से जटिल विषयों को उठाते हैं और मानो उनका काव्यांतरण कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कोई शोर-शराबा नहीं होता, न ही वाग्जाल का सहारा लिया जाता है, तब भी राजन न केवल पाठक की संवेदना को झकझोरते हैं बल्कि उसकी सोच की परिधि का विस्तार भी करते हैं। शिवदयाल न कहा कि राजेन्द्र राजन की कविताओं में नई सभ्यता का आवाहन है।


राजेन्द्र राजन ने काव्य पाठ की शुरूआत अपनी चर्चित रचना ’मनुष्यता के मोर्चे पर’ से की और ’श्रेय’, ’इतिहास में जगत’, ’युद्ध’,बाजार में कबीर, विजेता की प्रतीक्षा में ,बस यही एक अच्छी बात है, आदि दर्जन भर से अधिक कविताओं का  पाठ किया। पाठ का अंत उन्होंने अपनी अत्यंत चर्चित कविता ’बामियान में बुद्ध’ से किया।

प्रख्यात कवि आलोक धन्वा ने राजेन्द्र राजन की कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे बिना अलंकरण अपनी बात में वजन पैदा करते हैं - यह उनका सबसे विषेष गुण है। उन्होंने राजन को हिन्दी कविता का नया नक्षत्र कहा। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र राजन जमीनी आंदोलनों से जुडे़ रहे हैं, उनका अनुभव लोक व्यापक है, वे अपनी उम्र से बहुत आगे हैं। उनकी परिपक्वता और दृष्टिसम्पन्नता विस्मित करती है। आलोक धन्वा ने कहा कि वे संस्थान में पहली बार आकर अभिभूत हैं, यह एक ऐतिहासिक स्थान है जो स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण केन्द्र था।
ज्ञातव्य हो कि श्री ब्रजकिषोर स्मारक प्रतिष्ठान, बिहार विद्यापीठ परिसर में  स्थित है, जहाँ राजेन्द्र बाबू ने अंतिम साँसें ली, और दिल्ली राष्ट्रपति भवन जाने के पहले यहीं रहे। बिहार विद्यापीठ महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मजहरूल हक द्वारा स्थापित सदाकत आश्रम का हिस्सा था। आज इसी परिसर में मौलाना मजहरूल हक पुस्तकालय है जहाँ मूल्यवान पुस्तकें संरक्षित हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सकल पाठ यानी कविता-गोष्ठी हुई। इस सत्र की अध्यक्षता हिन्दी एवं अंग्रेजी के विद्वान, कला समीक्षक डॉ0 शैलेश्व वर सती प्रसाद ने की जबकि संचालन चर्चित कवि-कथाकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने किया। सत्र के प्रारंभ में ही डॉ0 प्रसाद ने राजेन्द्र राजन की कविताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे आम आदमी का पक्ष आम आदमी की भाषा में रखते हैं। उनमें कोई बनावटीपन नहीं है, जबकि  उनकी कविताओं  में चिंतनपरकता है।
कविता गोष्ठी में बिहार के चर्चित कवियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। आरंभ रानी श्रीवास्तव के कविता पाठ से हुआ जिनकी अनाम दामिनी को समर्पित कविता विषेष रूप से सराही गई। ’बैचेनियाँ’ तथा ’एक लड़का मिलने आता है’ के शायर संजय कुमार कुंदन की दो नज्मों ’उदासी की नजम’ और ’अब असली आजादी आई’ ने श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। उर्दू के महत्वपूर्ण शायर आलम खुर्शीद  ने अपनी ताजा गजलों से समा बाँधा - ’रात के खौफ से किस दर्जा परेशाँ  हैं हम / शाम से पहले चिरागों  को जलाए हुए हैं हम।’
 ’पिन कुशन’ और ’आग चखकर लीजिए’ जैसे चर्चित गजल संग्रहों के शायर प्रेम किरण ने अपनी गजल सुनाई -’ ’छू कर गुजरी हैं ठंडी हवाएँ मुझको/इसका मतलब है सब्ज शजर है कोई।’

समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर शरद रंजन शरद की रचनाएँ ’नींद का नाटक’ तथा ’सन् 2050’  जैसी सूक्ष्म अनुभूति की कविताएँ  स्रोताओं ने सराहीं । तीन संग्रहों से पहचान बना चुके युवा कवि शहंशाह   आलम ने ’तलाशी  के लिए प्रार्थना’ कविता सुनाकर श्रोताओं की  संवेदना को छुआ। चर्चित युवा कवि राजकिशोर राजन ने लम्बी कविताओं- ’सुनैना चूड़ीहारिन’ तथा ’एक मरणासन्न वृद्धा के नाम’ कविताओं का पाठ किया। दो संग्रहों से चर्चा में आए राकेष प्रियदर्शी  ने विषमता पर केन्द्रित दो कविताएँ - ’इतिहास’ तथा ’गवाही’ सुनाई। वरिष्ठ कवि अरुण शाद्वल ने बाजारवाद पर चोट करती अपनी सुन्दर रचना  का पाठ किया।
चर्चित कवि एवं समीक्षक मुकेष प्रत्युष ने अलग आस्वाद की अपनी रचना - ’मुहावरे में नहीं’ सुनाई। हिन्दी एवं भोजपुरी में लम्बे समय से रचनारत वरिष्ठ रचनाकार सतीश  प्रसाद सिन्हा ने गजल सुनाकर अपनी सहभागिता निभाई। युवा रचनाकार प्रतिभा ने गहरी संवेदना वाली कविता ’जर्जर खिड़की का’ पाठ किया। वरिष्ठ रचनाकार आर. पी. घायल ने दो गजलें सुनाकर कार्यक्रम में अपना महत्वपूर्ण योग दिया। उर्दू पत्रिका ’कसौटी जदीद’ के संपादक और शायर अनवर शमीम ने अपनी गजलों से समा बाँधा। कवि और वातायान मीडिया के निदेषक राजेष शुक्ल ने अपना एक सुंदर गीत - ’दिवस का अवसान’ सुनाकर मन मोह लिया। एक किशोर कवि शिवांग शुक्ल ने भी अपनी सृजनशीलता से प्रभावित किया  और प्रशंसा बटोरी।
पेशे  से चिकित्सक और हृदय से संवेदनशील कवि डॉ0 निखिलेश्ववर प्रसाद वर्मा ने अपनी तीन अनुभूतिपरक रचनाओं ’बाजार’, ’बदलते शहर की तस्वीर’ तथा ’चारमीनार का चूड़ी बाजार’ का पाठ कर श्रोताओं को विस्मित किया। सामाजिक कार्यकर्ता अरुण दास ने कालीन बनाने वाले बच्चे पर केन्द्रित एक कविता सुनाई।

कवि-कथाकार एवं ’विकास सहयात्री’ के संपादक शिवदयाल ने ’कूड़ा-समय’ शीर्षक से निहायत नई संवेदना की दो कविताओं का पाठ किया - ’इस दुनिया से / किसने कितना लिया / कूड़ा इसका हिसाब बताता है’। वरिष्ठ कवि, कथाकार एवं सत्र के संचालक भगवती प्रसाद द्विवेदी के गीत ’साहबजी’ - ’रोबीली गरदन अकड़ाए आए साहब जी, नैनन तीर कमान चढ़ाए आए साहब जी’ में निहित व्यंग्य ने सबको झकझोरा। सत्र की अध्यक्षता कर रहे कवि एवं समीक्षक शैलेश्वरवर सती प्रसाद ने अपनी तीन कविताएँ - ’मैं मुफस्सिल का हूँ’, ’पेड़’ तथा ’चिनकी लालटेन’ सुनाकर सबको मुग्ध कर दिया।
संस्थान के सचिव प्रो0 बी0बी0 मंडल ने  अतिथि कवि राजेन्द्र राजन, सहित सभी रचनाकारों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि संस्थान भाषा और संस्कृति के महत्व को स्थापित करने वाले ऐसे कार्यक्रमों का समय-समय पर आयोजन करता रहेगा। उन्होंने अलग से राजन की कविताओं का  
समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य भी प्रस्तुत किया।
वर्षा में उफनती गंगा के किनारे स्थित श्री ब्रजकिशोर स्मारक प्रतिष्ठान के भव्य भवन और प्रशांत  वातावरण में ’काव्य संगम’ लगभग चार घंटे चला। कार्यक्रम में महत्वपूर्ण रचनाकारों के अतिरिक्त गण्यमान्य श्रोताओं की उपस्थिति अंत तक बनी रही। सामाजिक, प्रशासनिक, शिक्षा एवं कला क्षेत्र के दर्जनों लोगों ने आयोजन को गरिमा प्रदान की, जिनमें से प्रमुख हैं - सर्वश्री  अरुण कुमार सिंह (उप महालेखा परीक्षक एवं नियंत्रक),
 प्रो0 किरण बाला प्रसाद, प्रो0 विपिन बिहारी मंडल, चक्रवर्ती अषोक प्रियदर्शी , सत्यनारायण मदन, सुनील सिन्हा,अनिल कुमार सिन्हा, जयेन्द्र सिंह, आभा सिन्हा, सृष्टि दयाल,, राजकिशोर राजन, कृष्ण मोहन मिश्र, सुरेशचन्द्र मिश्रा, सीताराम शरण, राकेश
प्रियदर्शी , प्रतिभा वर्मा, शिववचन शर्मा, विनीत कुमार, मोइन आजाद, अनवर शमीम,, सोनू किशन, विवेक कुमार, मणि लाल, मुकेष प्रत्युष ,जुगेश्वर , तरुण कुमार तथा  पप्पू कुमार आदि।
   

  नव-चैतन्य के महावट - रवींद्रनाथ                                 - शिवदयाल  ब चपन में ही जिन विभूतियों की छवि ने मन के अंदर अपना स्थाई निवा...